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आजकल कोर्ट  बाजी  बहुत चल रही  है. और कोर्ट बाजी मीडिया में बहुत फैसन में है . अपन को तो ये समझ नहीं आता की मीडिया को घटना के पहले ही कैसे पता चल जाता है की क्या होने वाला है और कौन मुजरिम है . कोर्ट को बाद में समझ आती है अपन को मीडिया पहले बता देते हैं बड़ी पंचायत हो गयी है . नहीं नहीं वो वाली नहीं सुप्रीम कोर्ट बड़ी पंचायत हो गयी है रोज की . सुबह उठो टीवी खोलो एक न एक पंचायत चालू मिलेगी *&^*&समझ नहीं आता के क्या करें आज राम है कल बलराम और परसों वही आदमी हराम हो जात...

कौन कहता है भारत एक गरीब देश है

जिस देश में खेल खेल में हजारों करोड़ बहा दिए जाते हैं और फिर जाँच जाँच खेला जाता है, वो देश गरीब कैसे हो सकता है. अब मैं तो सोच रहा हूँ की इस जाँच के खेल में कितना पैसा खर्च होगा . इस वाले खेल में हमारे खिलाडी सबसे तगड़े हैं. इसलिए पैसा भी उसी तरह खर्चा होगा. इस देश में ज्यादातर विधाएं मौखिक रही हैं. हम लिखी बांची में ज्यादा विश्वास नहीं करते इसलिए ये जाँच के खेल की भी विधि मौखिक रूप से सबकी जानकारी में है. कोई लिखा पढ़ी के नियम नहीं हैं. पहले हल्ला होहल्ला मचाया जायेगा . फिर लम्बी खिंची जाएगी. लोग अपने काम धंदे में लग जायेंगे .जैसे ही पता चलेगा की लोग भूल भाल गए हैं. मामला उपरी लेवल पे बातचीत से ख़तम किया जायेगा . लोग आपस में घर में बार में चुप्पे चुप्पे में सुलह करेंगे . फिर जाँच की एजेंसियां बदली की जाएँगी. फिर बली का बकरा ढूंडा जायेगा . लो अब ये मत पूछना की कित्ते पैसे खर्च होंगे. हजारों करोड़ बह के जहाँ जहाँ टिके हैं. सबकी प्राइवेट में निंदाई गुड़ाई की जाएगी. छान छून के गहरी छनेगी. अब आगे की बात कोई बताने की है क्या. कोई काम धंदा नहीं है आपके पास. चलो अपनी देखो . बल बच्चों को ...

JACK

जैक आजकल बहुत महत्वपूर्ण शब्द हो गया है. जैक के बिना कोई काम नहीं होता . ये हर जगह मौजूद है. नौकरी में , गैस कि टंकी में, नगर निगम में, कलेक्टर में सभी जगह , यहाँ तक कि भगवन के मंदिर में भी . अब मंदिर भी अलग अलग स्टेटस वाले होते हैं. कोई छोटा गुमटी नुमा , कोई जबरिया कब्जेधारी का पर्सनल , कोई बड़े नामधारी, कोई फेमस . जहाँ लाइन लगती है , उनके भी अलग अलग महिमा है. कोई दिन वाले है कोई रोज़ कि भीड़ वाले हैं. भीड़ वाले मंदिर में जैक लगाना पड़ता है. कोई ग़रीब भक्त अब सीधे सीधे भगवन से बात कर ले ये थोडा मुश्किल काम है. आपको धक्का पलेट दर्शन करना पड़ेंगे . कोई पुलिसिया टाइप वर्दी में आपको धकियायेगा आगे चलो और लोग भी हैं. के तुम्ही के लिए थोड़ी बैठे हैं. पर आप बहार लगी धार्मिक दुकानों कि दुकानदारी बढ़ा कर आइये . दस बीस रूपए के फूल , नारियल इत्यादि ले के आईये . तो एकाध मिनट खड़े होने आराम से मिल जायगा . फिर साथ में मिठाई वगैरह भी हो तो थोडा और भगवन से बात हो सकती है. अब आपको स्पेशल दर्शन करने हों तो फिर पुजारी के लिए भी कुछ चढावा ? और अगर फ्री फोकट के दर्शन करना हो तो उसके अलग जैक हैं. या तो आप कोई ...